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दामाद और सास की चुदाई कहानियाँ

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मेरी बड़ी लड़की जवान हो गयी और मुझ्को उसकी शादी करनी पढ़ गयी. मेरा दमाद राहुल बड़ा ही स्मार्ट था और बहुत ही समजदार लड़का था. जब मेरी बेटी के साथ एक दिन वो मेरे घर आया तो मैंने अपना दुःख दामादजी के सामने रखा.दामादजी, तुम्हारे ससुर तो मुझको आज भी हर रात कोसते रहते है. बार बार कहते है की तुमने मुझको दिया ही क्या?? अब तो वो पीने भी बहुत लगे है! मैंने आने दामाद से सारा दुखडा रो दिया. उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया.आप रोये नही मम्मीजी! मुझसे जितना हो सकेगा मैं आपके लिए करूँगा! दामाद जी बोले. मैं भावुक हो गयी. मैंने दामाद जी को सीने से लगा लिया. वो पहला दिन था जब मैं अपने ही दामाद पर आसक्त हो गयी थी. मेरा पति तो अब मुझको चोदता ही नही था.

अब वो हर रात शराब के नशे में धुत्त रहता था. उस रात दामादजी मेरे सपने में आये. मैंने उनको ही कल्पना में लेकर उस दिन चूत में ऊँगली डालके मुठ मार ली. दोस्तों कुछ दिनों बाद मैं अपने लडके को लेकर अपनी बेटी के यहाँ रक्षाबंधन पर गयी. वहां मैं और दमाद जी उपर छत पर चले गए. मैं एक बार फिर से लड़का न होने का दुखडा रोने लगी. राहुल [ मेरे दामाद] ने मुझको फिर से गले लगा लिया.मम्मीजी !! आप रोए मत! मैं सब कुछ देख सकता हूँ! पर आपका रोना नहीं देख सगता! राहुल बोलेमैंने उनको और कसके खुद से सीने से लगा लिया. वो मुझको मेरी पीठ पर थपकी दे देके चुप करने लगे. मैं अभी ३६ की थी पर मैं भी आखिर औरत थी. मेरा भी चुदने का मन होता था. मेरा मर्द तो अब मुझको पेलता ही नहीं था. मैंने उस वक्त पीठ पर खुला वाला ब्लौसे पहन रखा था. मैं आज भी ३६ साल की अच्छी लगती थी. इतनी  सुन्दर थी की किसी तो लाइन एक बार दे दूँ तो मुझको वो चोद के रहे. मैं आज भी देखने के अच्छी मॉल थी.यह सेक्स कहानी आप चुदाई कहानी साइट डॉट कॉम पर पड़ रहे है । जब मेरे दामाद [राहुल] ने मेरी खुली पीठ पर हाथ रखा और मुझे चुप करने लगे तो अचानक से मेरी चुदास जाग गयी. मैंने राहुल को सिर उठाकर अर्थपूर्ण कामुक द्रिस्ती से देखा. राहुल भी मुझको अर्थपूर्ण नजरों से देखने लगे जैसे कह रहें हो सासु जी ! लडके के लिए इतना मत परेशान होइए. मैं आपको चोद चोद के एक लड़का जरुर दे दूँगा. मैं राहुल को कुछ देर तक एक टक देखती रही तो वो भी मुझको बिना पलक झपकाए घूरते रहे. मैंने धीरे से उनको कमरे की ओर इशारा कर दिया.

राहुल समज गये की आज सासु माँ चुदने के मूड में है. वो भी मुझको चोदना चाहते थे. मेरी बड़ी लड़की [माला] को चोद चोद के राहुल थोडा बोर हो गये थे. अब वो भी सायद एक नयी चूत की तलाश कर रहें थे. राहुल और मैं उपर बने एक कमरे में आ गए. इस सर्दियों में लोग इस कमरे में धुप के कारण आ जाते थे. ये वही कमरा था. अंदर आते ही राहुल ने मुझको सीने से लगा लिया.
मम्मी जी !! आज एक बात कहू!! नाराज तो नहीं होगी?? राहुल बोले
नही बेटे! मैंने कहा
मम्मीजी जब मेरी आपकी बेटी से शादी हो रही थी , जी कर रहा था आपके गले में वरमाला डाल दूँ. आपकी लड़की भी आपके सामने कुछ नहीं! मेरे दामाद बोले
थैंक यू बेटे!! मैंने कहा
मम्मीजी!! आजके दिन के लिए आप मेरी जोरू बन जाओ!! दामाद ने पेशकश की. मैं तो खुद ही अपनी तरह से उनसे चुदने को तैयार थी. कहाँ मेरे पति ने मुझको १ साल ने नही चोदा था.
दामाद जी ! मैं भी आपको पसंद करती हूँ! मुझको मंजूर है!  मैंने भी कह दिया. बस फिर क्या था दोस्तों, दामादजी ने मुझको अपने सीने से लगा लिया. मेरे मम्मो पर उन्होंने अपने हाथ रख दिए. मैंने लब उन्होंने अपनी बीवी की तरह समज के चूम लिए. आह कितना सुखद मिलन था ये. आज मैं अपने जवान दामाद जी का लंड खाने वाली थी. मैंने भी उनको कन्धों से पकड़ लिया. राहुल मेरे होंठ पीने लगा. मैं तो धन्य हो गयी दोस्तों. पता नही कितनी बार मैंने उनको याद करके मुठ मारी होगी. आज सच में उनका लंड खाने वाली थी. दामाद जी के हाथ मेरे बूब्स पर सरकने लगे. मेरे तन बदन में काम की ज्वाला भड़क गयी.यह सेक्स कहानी आप चुदाई कहानी साइट डॉट कॉम पर पड़ रहे है ।सासू माँ ! आज चूत दे दो!! मना मत करना राहुल [मेरे दामाद जी] बोले.चोद ले मुझको बेटा!! मैं तो कबसे तेरा वेट कर रही हूँ! मैंने कहा.वही पास में एक बेड बड़ा था. दामाद जी मुझको उस पर ले आये. मेरा ब्लोउज उतार दिया. मेरी ब्रा की उतार दी. मेरे नंगी छातियों को वो मुह से लगाकर पीने लगा. कहाँ मैं ३६ साल की औरत थी और कहाँ मेरे दामाद २४ २५ साल के थे. दोस्तों आज भी मेरा फिगर मेन्टेन था. मेरी चुचियाँ भी कसी थी. पेट भी मेरा सपाट था जबकि मेरी उम्र की सारी औरतों का पेट निकल आता है. दामाद जी तो मेरे चूचियों को आम की तरह चूस रहे थे . आह !! बड़ी तृप्ति मिली. एक साल से मैं कितनी प्यासी थी. इंडिया में औरत को रोटी , कपड़ा सब देते है पर कोई ये नहीं पूछता की तुमको लंड वण्ड समय पर मिलता है की नहीं.

पिछले एक साल से मेरे शराब में टल्ली आदमी ने मेरी जिस्म की भूख की कोई खोज खबर नहीं ली. उसको तो बस शराब से मतलब था. औरत को कोई चोदता है या नही उसको कोई मतलब नहीं था. आज दामाद जी से मेरी काम की प्यास को समझा. दामाद जी अपने हाथों से मेरे गोल मटोल गेंद जैसे दूध को छूते मसलते रहे, मेरी चुचियों को वो पीने लगे. मैं मस्ती में डूब गयी. उन्होंने मेरी साडी निकाल कर मेरा पेटीकोट भी उतर दिया. दोस्तों, जबसे मेरी ३ लडकियां एक के बाद एक हो गयी की मैंने पनटी पहनना बंद बार दी. मेरी चूत के दर्शन करके तो दामाद जी खुसी में डूब गये.सासू माँ!! आपकी चूत कितनी खुब्सूरत है!! राहुल [मेरे दामाद जी] मेरी चिड़िया को देखकर बोले. मैं आज भी अपनी खूबसरत चूत पर गर्व करने लगी. दामादजी मेरी चूत पीने लगे. मैंने अपनी टांगे और फैला दी. अब मेरी चूत और चौड़ी हो गयी. राहुल मेरी बुर पीने लगे. दोस्तों, जहाँ मैं बिलकुल दूध सी गोरी थी वही मेरी बुर, मेरी चिडिया थोड़ी सावली थी. पर ये सावलापन ही तो भारतीय औरतों की चूत की शान होती है. मेरे दामाद जी लगातार मेरी चूत पीते जा रहे थे. उनके स्पर्श ने मेरी चुचियाँ अब और फूल गयी थी. मैं अपनी चुचियों को खुद सहलाने लगी. दामादजी ने अपना बड़ा सा लंड मेरी बुर में जब डाला तो एक बार में अंदर नहीं गया.यह सेक्स कहानी आप चुदाई कहानी साइट डॉट कॉम पर पड़ रहे है ।क्यूंकि मेरे पति ने मुझको एक साल से नहीं पेला था. इसलिए दामादजी को बड़ा संगर्ष करने लगा. फिर उन्होंने अपनी जवानी का पॉवर लगा दिया, एक ढाका जोर से मारा और उनका मजबूत लम्बा लंड मेरी बुर की गहराई नापने लगा. मेरा दामाद जी मुझको लेने लगे, मुझको प्यार मुहब्बत से चोदने लगे. मैं कितनी किस्मत वाली छिनार हूँ. जो दामाद मेरी लौंडिया को हर रात कुत्ते की तरह चोदता था, आज मैं वही जावान लंड खा रही थी. उसका भोग लगा रही थी. अपने पति से मुझको हमेशा यही सिकायत रही थी की वो मुझको हमेशा बड़ी धीरे धीरे पेलता था, पर दोस्तों आज तो मेरे भाग खुल गाये थे. मेरा दामाद मुझको हचाह्च करके चोद रहा था. मैंने अपनी दोनों टांगे ऊपर उठा ली थी. राहुल{दामाद ] मुझको बड़ी जल्दी जल्दी चोद रहे थे. मैं पूरी तरह से उसके कब्जे में थी. वो मुझ पर पूरी सवारी कर रहें थे. उनके जल्दी जल्दी फटके मारने से मेरी चूत बड़ी अच्छी तरह से चुद रही थी. आज कितने दिनों बाद मेरे बदन की गर्मी शांत हुई थी. आज ३६५ दिनों के बाद मेरी चूत की गर्मी शांत हो रही थी. दोस्तों, मैं कबसे प्यासी थी. राहुल ने मुझको २० मिनट तो बड़ी जल्दी जल्दी चोदा किसी मचिन की तरह. मैं खुश हो गयी. फिर अचानक से उनका लंड बाहर निकल आया. मैंने जल्दी से उनका लंड फिर से अपनी चूत में डाल दिया.

अगर इस वक्त मेरी बेटी आ जाती और मुझको दामाद जी से चुदते देख लेती तो मरे जलन से वो मर जाती.कोई भी औरत सब कुछ बाट सकती है , पर कही अपने हिस्सा का लंड नही बाट सकती. फिर चाहे उनकी माँ को ही वो लंड खाना हो. जब मैं दामाद जी का लंड फिर से अपनी बुर में डाल दिया तो राहुल ने मेरी कमर कसके पकड़ ली और मुझको जोर जोर से चोदने लगे. आ आहा हा !! मैं मनमोहक मादक सिस्कारियां लेने लगी. दामाद जी के धक्कों से मेरी चुचियाँ दाए बाए भागने लगी तो दामाद जी ने मेरे दोनों मम्मो को कसके पकड़ लिया और मुझको चोदने लगे.ओह्ह मम्मी जी !! मुझको पता होता की तुम इतना मस्त माल हो तो मैं तुमको पहले ही लाइन देता. मैं तुमको पहले ही चोद लेता!! मेरे दामाद जी बोले. कुछ देर बाद वो मेरी बुर में ही स्खलित हो गये. अपने सैयां की तरह मैंने उनको कलेजे से लगा लिया.सासू माँ!! अब मैं तुमसे मिलने हर महीने की आखरी तारिक को आऊंगा और तुम्हारी चूत मारूंगा!! बोलो सहमत हो?? दामाद जी[राहुल ] ने कहावो तो ठीक है बेटा! पर कहीं जमाने को खबर ना हो जाए? कहीं लोगों को पता न चल जाए?? मैंने कहादुनिया, जमाना मेरे लौडे से!! अब मुझको तो तुम्हारी चूत चाहिए तो बस चाहिए!!  यह सेक्स कहानी आप चुदाई कहानी साइट डॉट कॉम पर पड़ रहे है । दामाद जी बोलेठीक है बेटा!! मैंने भी कह दिया. क्यूंकि कहीं न कहीं मैं भी उसने चुदवाना चाहती थी. कबतक मैं बिना लंड के काम चलाती. कुछ देर बाद राहुल और मैं ६९ में आ गए. मैं दामाद का लंड चूसने लगी और वो फिर से मेरी फूली फूली गुजिया पीने लगे. मेरी चूत में ऊँगली भी करने लगे. दामाद जी, मेरी चीकनी नंगी पीठ सहला भी रहें थे, और वहीँ कुछ कुछ अंतराल में मेरी बड़े बड़े गोल गोल लहराते चूतडों पर चपट भी लगा रहें थे. मैं अपने सैया जी [दामाद जी] के साथ गुलछर्रे उड़ा रही थी. वो प्यार भरे लहजे में चट चट करके मेरे गोल चूतडों पर चपट लगा रहें थे. मुझसे खुसी थी की आज कोई मुझको १ साल बाद इतना प्यार तो कर रहा है. मेरा इतना ख्याल तो कर रहा है. मैं उपेक्षित तो नही हूँ.

सासू माँ !! गाड़ दोगी!! दामाद जी संकोच करते हुए बोले. वो बड़े संकोची थे.हाँ हाँ बेटा!! गाड़ भी ले लो. इसमें संकोच कैसा!! मेरे पास जो है वो तुम्हारा ही तो है! सास के लिए दामाद हमेशा पूजनीय होता है. ले लो, मेरी गाड़ भी ले लू!! मैंने कहा. मैं पेट के बल अब पलट गयी. और २ हाथ और २ पैरों पर कुतिया बन गयी. मेरी कुंवारी गांड देख कर दामाद जी के मुह में पानी आ गया. मेरी गांड पीने लगे. ओह्ह ! आज मुझको कितना सुकून मिला. अब एक बार फिर दामाद जी[ राहुल] का लंड फिर से खड़ा हो गया था. मेरी गांड में जब वो लंड पेलने लगे तो जाए ही न. दामाद जी ने मेरी गाड़ में थोडा थूक मला और फिर से लंड पेलने लगा. १० मिनट बाद मैं उनसे गाड़ मरवाने लगी. जहाँ दोस्तों थोडा दर्द हो रहा था वही नशिला चुदाई का मजा भी मिल रहा था. राहुल मजे से मेरी गांड चोद रहें थे. मेरे दोनों चूतडों को उन्होंने हाथ से फैला दिया था और मस्ती से मेरी गांड चोद रहें थे. दोस्तों , मैं ये बात तो जरुर कहूँगी की जब आगे से दामाद मुझको चोद रहे तो तो इतनी कसावट नही मिल रही थी. पर पीछे से गांड चुदवाने में मुझको कहीं जादा मस्ती मिल रही थी. राहुल चट चट मेरी चूतडों थप्पड़ लगा रहें थे. उस दिन २ घंटे तक हम सास दामाद उस कमरे में गुलछर्रे उड़ाते रहें. यह सेक्स कहानी आप चुदाई कहानी साइट डॉट कॉम पर पड़ रहे है ।उसके बाद मैं अपने दामाद से पूरी तरह फस गयी. वो कोई न कोई बहाने से मेरे घर आने लगे और मुझको जी भरके पेलने लगे. १ साल बाद मेरे पति को ये बात पता चल गयी. तब मेरे दामाद ने मेरे पति यानि अपनी ससुर को खूब पीटा. उसके बाद मेरे पति से कुछ नही कहा. अब तो सब जान गये है की स्वाति सिंह अपने दामाद से फसी है. कुछ दिनों बाद मैं पेट से हो गयी और मुझको एक खुबसूरत सा लड़का हुआ. मेरे ठाकुर पति अब खुश है की उनको अपना वारिस मिल गया. वो जानते है की ये लड़का उनके दामाद का ही है, पर वारिस पाकर वो खुश रहते है. मेरा दामाद आज भी हर महीने आता है. हमदोनो ऊपर कमरे में चले जाते है. मेरे पति जान जाते है की कमरे में उनकी बीवी अपने दामाद से चुदवाने गयी है. पर अब वो कुछ नही कहते.कैसी लगी हम दामाद और सास की चुदाई स्टोरी , अच्छा लगी तो शेयर करना , अगर कोई मेरी प्यासी चूत की चुदाई करना चाहते हैं तो जोड़ना लंड की प्यासी तड़पती औरत

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